पाठ 2: पंचलाईट

फणीश्वर नाथ 'रेणु'

Previous
Next



पात्र-परिचय

अगनू महतो -- महतो टोली की पंचायत का छड़ीदार
सरदार, दीवान -- पंचायत के सदस्य।
फुटंगी झा -- ब्राह्मण-टोली का सदस्य।
गुलरी काकी -- मुनरी की माँ।
रूदल साह -- गाँव का बनिया।
गोधन -- गाँव का साधारण व गुणवान व्यक्ति, जो मुनरी से प्रेम करता है।
मुनरी -- साधारण ग्राम बाला और गुलरी काकी की बेटी।
कनेली -- मुनरी की सहेली।
मूलगैन -- कीर्तन मण्डली का सदस्य।



पाठ का सारांश


पेट्रोमैक्स यानी पंचलैट की खरीददारी

गाँव में निवास करने वाली विभिन्न जातियाँ भिन्न-भिन्न टोली बनाकर रहती हैं। उन्हीं में से एक है-महतो टोली। महतो टोली के पंचों ने पिछले पन्द्रह महीने से दण्ड-जुर्माने की जमा राशि से रामनवमी के मेले से इस बार पंचलाइट खरीदी। पंचलाइट खरीदने के पश्चात् बचे दस रुपए से पूजा की सामग्री भी खरीदी जाती है। मेले से पंचलाइट की खरीदारी के बाद सभी खरीदार पंच गाँव की ओर लौटे, जिनमें सबसे आगे अगनू महतो पंचलाइट का डिब्बा माथे पर लेकर आ रहा था और उसके पीछे-पीछे सरदार, दीवान और पंच लोग थे। पंचलाइट देखने के लिए टोली के सभी बच्चे, औरतें एवं मर्द एकत्रित हो चुके थे और सरदार ने अपनी पत्नी को पंचलाइट की पूजा-पाठ का प्रबन्ध करने के लिए कहा।


महतो टोली में उत्साहपूर्ण वातावरण

गाँव में पंचलाइट आते ही बच्चे, औरतें और अन्य सभी लोग उत्साहित होते हैं। गाँव की पंचायत का छड़ीदार अगनू महतो सभी लोगों को पंचलाइट से दूर रहने की चेतावनी देता है कहीं अधिक उत्साहित लोग पंचलाइट को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुँचा दें। पंचलैट आने की खुशी में औरतों की मण्डली में गुलरी काकी गोसाई का गीत गुनगुनाने लगती हैं तो छोटे-छोटे बच्चे उत्साह के कारण हुड़दंग करना शुरू करने लगते हैं। टोलीभर के लोग सरदार के दरवाजे पर आकर पंचलैट-पंचलैट की रट लगाने लगते हैं। इस प्रकार पूरी महतो टोली का वातावरण उत्साह से भरा हुआ था।।


पंचलैट को जलाने की समस्या

महतो टोली के सभी लोग ‘पंचलैट’ के आने से अत्यधिक उत्साहित हैं, लेकिन उनके सामने एक बड़ी समस्या यह आ जाती है कि पंचलैट जलाएगा कौन? क्योंकि किसी भी व्यक्ति को ‘पंचलैट’ जलाना नहीं आता था। महतो टोली के किसी भी घर में अभी तक ढिबरी नहीं जलाई गई थी, क्योंकि सभी पंचलैट की रोशनी को ही सभी ओर फैला हुआ देखना चाहते हैं। पंचलैट के न जलने से सभी के चेहरे उतर जाते हैं। पंचलैट न जलने की खबर सुनकर राजपूत टोली के लोग ब्राह्मण टोली का मज़ाक बनाने लगते हैं। इसके बावजूद, पंचों ने तय किया कि दूसरी टोली के व्यक्ति की मदद से पंचलैट नहीं जलाई जाएगी, चाहे वह बिना जले ही पड़ी रहे।


पंचलैट जलाने के लिए गोधन को बुलवाना

गुलरी काकी की बेटी मुनरी, गोधन से प्रेम करती थी और उसे पता था कि गोधन को पंचलैट जलाना आता है, लेकिन पंचायत ने गोधन का हक्का-पानी बन्द कर रखा था, क्योंकि गोधन रोज मुनरी को देखकर ।’सलम-सलम’ वाला सलीमा का गीत गाता था, परन्तु आज गोधन की। आवश्यकता महतो टोली के लोगों को पड़ गई थी। इसी आवश्यकता को जानते हुए मुनरी ने अपनी सहेली कनेली द्वारा सरदार तक यह सूचना पहुँचा दी कि गोधन ‘पंचलैट’ जलाना जानता है। सभी पंच सोच-विचार कर अन्त में यह निर्णय लेते हैं कि गोधन को बुलाकर उसी से ‘पंचलैट’ जलवाई जाए, क्योंकि यह टोली की इज्ज़त व प्रतिष्ठा का सवाल है। अत: सरदार द्वारा गोधन को बुलवाने का आदेश दिया जाता है।


गोधन द्वारा ‘पंचलैट’ जलाना

सरदार द्वारा गोधन को बुलाने के लिए छड़ीदार को भेजा जाता है, परन्तु वह नहीं आता। तत्पश्चात् गुलरी काकी गोधन को मनाने जाती हैं तो वह मान जाता है और पंचलैट जलाने के लिए तैयार हो जाता है। सर्वप्रथम वह पंचलैट में तेल भरता है और पंचलैट जलाने के लिए स्पिरिट माँगता। है, परन्तु पंच स्पिरिट खरीदना ही भूल जाते हैं। अब स्पिरिट न होने पर एक बार फिर टोली के लोगों के चेहरे मुरझा जाते हैं। गोधन होशियार लड़का है, वह स्पिरिट न होने पर गरी अर्थात् नारियल के तेल से ही पंचलैट जलाने का प्रयास करता है और धीरे-धीरे पंचलैट जलने लगती है, पंचलैट की रोशनी से सारी टोली जगमगा उठती है, जिसे देख सभी के चेहरे खिल उठते हैं। कीर्तन-मण्डली के लोग एक स्वर में महावीर स्वामी की जय ध्वनि करते हुए कीर्तन शुरू कर देते हैं। इस प्रकार पंचलैट जलाकर गोधन सबका दिल जीत लेता है।


पंचों द्वारा गोधन को माफ़ करना

गोधन ने जिस होशियारी से ‘पंचलैट‘ को जला दिया था, उससे सभी प्रभावित होते हैं। गोधन के प्रति सभी लोगों के दिल का मैल दूर हो जाता है। मुनरी बड़ी हसरत भरी निगाहों से गोधन को देखती है। सरदार गोधन को बड़े प्यार से अपने पास बुलाकर कहता है कि-“तुमने जाति की इज्जत रखी है। तुम्हारा सात खून माफ़। खूब गाओ सलीमा का गाना। अन्त में गुलरी काकी गोधन को रात के खाने पर निमन्त्रित करती है। गोधन ने एक बार फिर से मुनरी की ओर देखा और नज़र मिलते ही लज्जा से मुनरी की पलकें झुक जाती हैं।


लघु उत्तरीय प्रश्न

निर्देश: नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार, कहानी सम्बन्धी प्रश्न के अन्तर्गत पठित कहानी से चरित्र-चित्रण, कहानी के तत्त्व एवं तथ्यों पर आधारित दो प्रश्न दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक प्रश्न का उत्तर देना होगा, इसके लिए 4 अंक निर्धारित हैं।

प्रश्न 1. ‘पंचलाइट’ कहानी की समीक्षा कहानी के तत्त्वों के आधार पर कीजिए।
अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी की कथावस्तु पर प्रकाश डालिए।
अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी की विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्र के जीवन से सम्बन्धित प्रस्तुत कहानी से गाँव की रूढ़िवादिता, सरलता एवं अज्ञानता के बारे में स्पष्ट संकेत मिलता है। ‘पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की आंचलिक कहानी है। यह कहानी ग्रामीण जीवन पर आधारित है। इसमें ऑचलिक परिवेश के आधार पर पात्रों का चित्रण किया गया हैं। इसकी समीक्षा इस प्रकार है:-
कथानक
प्रस्तुत कहानी में फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ ने पैट्रोमैक्स (जिसे गाँव वाले ‘पंचलाइट’ कहते हैं) के माध्यम से ग्रामवासियों की मनोस्थिति की वास्तविक झलक प्रस्तुत की है। यह कहानी घटनाप्रधान है, जिसमें बताया गया है कि आवश्यकता किस प्रकार मनुष्य के बड़े से बड़े दिग। संस्कार तथा निषेध को भी अनावश्यक सिद्ध कर देती है, जैसा गोधन के साथ हुआ। महतो टोली के पंच पेट्रोमैक्स खरीद तो लाते हैं, किन्तु उसे जलाना नहीं जानते। उनके लिए यह अपमान की बात हो जाती है कि उनका ‘पंचलाइट’ पहली बार किसी दूसरी टोली के सदस्यों द्वारा जलाया जाए। इस समस्या को समाधान मुनरी बताती है, क्योंकि उसका प्रेमी गौधन ‘पंचलाइट जलाना जानता है। ‘पंचायत’ ने गौधन का हुक्का-पानी बन्द कर रखा है, किन्तु जाति की प्रतिष्ठा को बचाए रखने के लिए गोधन को पंचायत में आने की अनुमति दे दी जाती हैं। वह ‘पंचलाइट’ को स्प्रिट के अभाव में गरी (नारियल के तेल से ही जला देता है। अब गोधन पर लगे सारे प्रतिबन्ध हटा लिए जाते हैं और उसे इछानुसार स्वतन्त्र आचरण करने की भी छूट मिल जाती है।
पात्र तथा चरित्र-चित्रण
प्रस्तुत कहानी चूँकि आंचलिक कहानी है। अतः इस कहानी के केन्द्र में अंचल-विशेष या क्षेत्र विशेष हैं, कोई पात्र या चरित्र केन्द्र में नहीं है। इसके बावजूद ‘पंचलाइट’ कहानी का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्रमुख पात्र गोधन है। कहानीकार ने कुछ पात्रों के चरित्रों की रेखाएँ उभारने की कोशिश की है। प्रस्तुत कहानी में सरदार, दीवान, मुनरी की माँ, गुलरी काकी, फुटंगी झा आदि एक वर्ग के पात्र हैं, जबकि गोधन, मुनरी दूसरे वर्ग के। कहानी के सभी पात्र जीवन्त प्रतीत होते हैं। उनके माध्यम से ग्रामवासियों की मनोवृत्तियों का परिचय बड़े ही यथार्थ रूप में प्राप्त होता है। लेखक को ग्रामीण समूह के चरित्र को उभारने में विशेष सफलता मिली है।
कथोपकथन या संवाद
प्रस्तुत कहानी के संवाद रोचक, सरल, स्वाभाविक और संक्षिप्त हैं। अनावश्यक संवाद नहीं हैं। संवादों के माध्यम से बिहार के ग्रामीण अंचल की भाषा का प्रयोग, संवादों की स्वाभाविकता, संवादों के माध्यम से ग्रामीण जीवन की अशिक्षा, विवादिता, अज्ञानता पर प्रकाश डालकर जीवन्त वातावरण निर्मित किया गया है। जैसे मुनरी ने चालाकी से अपनी सहेली कनेली के कान में बात डाल दी-‘कनेली। चिगों, चिव चिन …..’ कनेली मुस्कुराकर रह गई–’गोधन तो बन्द है।’ मुनरी बोली-‘तू कह तो सरदार से। गोधन जानता है ‘पंचलाइट’ बालना।’ केनेली बोली, ‘कौन, गोधन? जानता है बालना? लेकिन ….’ इस प्रकार इस कहानी के संवाद पात्र एवं परिस्थिति के अनुकूल हैं। कथाकार ने उनका चरित्र चित्रण मनोवैज्ञानिक आधार पर किया है।
देशकाल और वातावरण
रेणु जी की कहानी ग्रामीण परिवेश की आँचलिक कहानी है। इस कहानी में बिहार के ग्रामीण अंचल का चित्र प्रस्तुत किया गया है। वातावरण की सजीवता पाठकों को आकर्षित करने वाली हैं। ‘पंचलाइट’ के माध्यम से ग्रामीणों के आचार-विचार, अन्धविश्वास आदि का भी चित्रण हुआ है। यद्यपि इस कहानी में वातावरण का वर्णन नहीं किया गया है, तथापि घटनाओं और पात्रों के माध्यम से वातावरण स्वयं जीवन्त हो उठता है।
भाषा-शैली
प्रस्तुत कहानी की भाषा बिहार के ग्रामीण अंचलों में बोली जाने वाली जन भाषा है। इस भाषा में स्वाभाविकता झलकती है। गाँव के लोग शब्दों का उच्चारण अशुद्ध करते हैं। उदाहरण के रूप में, टोले की कीर्तन मण्डली के मूलगेन ने अपने भगतिया पछकों को समझाकर कहा- देखो, आज ‘पंचलैट’ की रोशनी में कीर्तन होगा। बेताले लोगों से पहले ही कह देता हैं, आज यदि आखर धरने में छेद-वेद हुआ, तो दूसरे दिन से एकदम बैंकार।” रेणुजी ने इस कहानी में व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग किया है। उदाहरणस्वरूप ‘एक’ नौजवान ने आकर सूचना दी–राजपूत टोली के लोग हँसते-हँसते पागल हो रहे हैं। कहते हैं, कान पकड़कर ‘पंचलैट’ के सामने पाँच बार उठो बैठो, तुरन्त जलने लगेगा।” पूरी कहानी ग्रामीणों की अज्ञानता, अशिक्षा, रूढिवादिता पर व्यंग्य करती हुई आगे बढ़ती है।
उद्देश्य
प्रस्तुत कहानी में रेणु जी ने ग्राम सुधार की प्रेरणा दी है। इसके साथ-साथ, यह भी सन्देश दिया है कि आवश्यकता बड़े-से-बड़े संस्कार और निषेध को अनावश्यक सिद्ध कर देती है। इसी केन्द्रीय भाव के आधार पर कहानी के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है। गोधन द्वारा पेट्रोमैक्स जला देने पर उसकी सब गलतियाँ माफ कर दी जाती हैं। उस पर लगे सारे प्रतिबन्ध हटा दिए जाते हैं।
शीर्षक
‘पंचलाइट’ कहानी का शीर्षक अत्यन्त संक्षिप्त और आकर्षक है। ‘पंचलाइट’ शीर्षक की दृष्टि से यह एक उच्च स्तरीय कथा है, जिसमें एक घटना के माध्यम से सामाजिक सदियों को तोड़ते हुए दिखाया गया है। पंचलाइट शीर्षक कहानी के भाव, उददेश्य और विषय-वस्तु की दृष्टि से पूर्णतः सार्थक है। सम्पूर्ण कहानी शीर्षक के इर्द-गिर्द घूमती है। इस प्रकार यह कहानी शीर्षक की दृष्टि से सफल कहानी है



प्रश्न 2. पंचलाइट’ कहानी के आधार पर ‘गोधन’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी का प्रमुख पात्र कौन है? उसका चरित्रांकन कीजिए।

उत्तर: रेणुजी की आँचलिक कहानी ‘पंचलाइट’ में ग्रामवासियों की मन:स्थिति की वास्तविक झलक दिखती है। इस कहानी का प्रमुख पात्र ‘गोधन’ है, जिसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ उल्लेखनीय हैं।
(i) युवक की स्वाभाविक प्रवृत्ति गोधन युवा है। अत: उसके व्यक्तित्व में युवा वर्ग की कुछ स्वाभाविक प्रवृत्तियाँ निहित हैं। वह मनचला एवं लापरवाह युवक है। वह फिल्मी गाने गाता है। मुनरी से प्रेम करता है और बाहर से आकर बसने के बावजूद पंचों के खर्च के लिए उन्हें कुछ देता नहीं है। यह कहना अधिक उचित होगा कि वह एक अल्हड़ ग्रामीण युवा है।
(ii) गुणवान व्यक्तित्व गोधन अशिक्षित है, लेकिन उसमें गुणों की कमी नहीं है। वह पूरे महतो टोली में एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जो पेट्रोमैक्स जलाना जानता है। वह अत्यन्त चतुर भी है। वह अपनी इस विशेषता को मुनरी को बता देता है, जो इसे सरदार तक पहुँचा देती है। गोधन इतना काबिल है कि वह बिना स्पिरिट के ही गरी अर्थात् नारियल के तेल से पेट्रोमैक्स जला देता है। इससे उसकी बौद्धिकता का भी पता चलता है।।
(iii) स्वाभिमानी गोधन स्वाभिमानी है, इसलिए हुक्का-पानी बन्द करने के बाद जब छड़ीदार उसे बुलाने जाता है, तो वह आने से इनकार कर देता है।। हुक्का-पानी बन्द करने को वह अपना अपमान समझता है। जिस गुलरी काकी के कहने पर उसे सज़ा सुनाई गई थी, उन्हीं के मनाने पर वह ‘पंचलैट’ जलाने के लिए आता है।
(iv) अपने समाज की प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील गोधन अपने समाज की मान-प्रतिष्ठा के प्रति अत्यन्त संवेदनशील है। जिस समाज या पंचायत ने उसका हुक्का-पानी बन्द कर दिया था, उसी समाज की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए वह अपने अपमान को भूल जाता है। बिना स्पिरिट के ही पंचलैट जलाकर वह अपने समाज, जाति एवं पंचायत की मान-प्रतिष्ठा की रक्षा करता है।
(v) निर्भीक व्यक्तित्व गोधन का व्यक्तित्व अत्यन्त निर्भीक है। वह किसी से बिना डरे मुनरी के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त कर देता है। इस प्रकार, कहा जा सकता है कि गोधन का चरित्र ग्रामीण परिवेश में पलने-बढ़ने वाले किसी सामान्य युवा लड़के से मिलता-जुलता होने के साथ-साथ उसमें वह बौद्धिकता एवं विवेकशीलता भी मौजूद है, जो उसे आधुनिकता की ओर ले जाती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि गोधन एक स्वाभाविक प्रवृत्ति वाला गुणवान, स्वाभिमानी, संवेदनशील व निर्भीक युवक है।



प्रश्न 3. पंचलाइट’ कहानी की प्रमुख स्त्री पात्र ‘मुनरी’ की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: ‘मुनरी’ पंचलाइट कहानी की प्रमुख स्त्री पात्र है, जो गोधन की आसक्ति से प्रभावित है। ‘रेणु’ ने मनरी के चरित्र का चित्रण बड़े ही सजीव. स्वाभाविक रूप से अपनी कहानी में किया है। इस प्रकार मुनरी के चरित्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(i) लज्जाशील व संकोची मुनरी गाँव में निवास करने वाली साधारण-सी लड़की है। यह बहुत ही लज्जाशील व संकोची प्रवृत्ति की है। जब गाँव में पंचलाइट जलाने की समस्या उत्पन्न होती है, तो मुनरी जानती है कि पंचलाइट जलाना गोधन को आता है, परन्त उसे तो गाँव से निष्कासित किया जा चुका था। सरदार को यह खबर देने में भी वह प्रत्यक्ष रूप से गोधन का नाम नहीं ले पाती है और अपनी सहेली कनेली के माध्यम से सरदार तक इस खबर को पहुँचाती है। इसके अतिरिक्त गोधन द्वारा मनरी की ओर देखे जाने के कारण मुनरी अपनी पलकें झुका लेती है। अत: कहा जाना चाहिए कि मुनरी एक लज्जाशील व संकोची प्रवृत्ति की लड़की है।
(ii) सामाजिक प्रतिष्ठा की हिमायती महतो टोली के लोगों ने यह निर्णय लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, लेकिन हम यह पंचलाइट किसी अन्य टोली के सदस्य से नहीं जलवाएँगे, क्योंकि यह अपमान की बात होगी। यह सब देखकर मुनरी’ ने अप्रत्यक्ष रूप से गोधन का नाम सबके समक्ष लिया। गोधन ही एक ऐसा व्यक्ति था, जो पंचलाइट जलाना जानता था। इस प्रकार सदस्यों ने गोधन को बुलाने का फैसला लिया और पंचलाइट जलाई गई। पंचलाइट जलना ही सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक था। उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर कहा जा सकता है कि मुनरी एक साधारण ग्राम युवती है, जो लज्जाशील व संकोची होने के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा की हिमायती भी है।

प्रश्न 4. ‘पंचलाइट’ कहानी के उद्देश्य को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ हिन्दी साहित्य जगत् के सुप्रसिद्ध आंचलिक कथाकार हैं। ग्रामीण अंचलों से उनका निकट का परिचय है। बिहार के अंचलों के सजीव चित्र उनकी कथाओं के अलंकार हैं। पंचलाइट भी बिहार के परिवेश की कहानी है। कहानीकार ने ग्रामीण अंचल का वास्तविक चित्र खींचा है। आवश्यकता किस प्रकार बड़े-से-बड़े संस्कार और निषेध को अनावश्यक सिद्ध कर देती है। इसी केन्द्रीय भाव के आधार पर कहानी के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है। गोधन द्वारा पेट्रोमैक्स जला देने । पर उसकी सब गलतियाँ माफ़ कर दी जाती हैं। उस पर लगे सारे प्रतिबन्ध हटा लिए जाते हैं तथा उसे मनचाहे आचरण की । छूट दे दी जाती है। ग्रामवासी जाति के आधार पर अनेक टोलियों में बँट जाते। हैं। वह आपस में ईर्ष्या-द्वेष के भावों से भरे रहते हैं, इसका बड़ा सजीव चित्रण। कहानी में प्रस्तुत किया गया है। कहानीकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस। आधुनिक युग में अभी भी कुछ गाँव और जातियाँ पिछड़ी हुई हैं। रेणुजी ने अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम-सुधार की प्रेरणा भी दी है।





धन्यवाद !


कृपया अपना स्नेह बनाये रखें ।
Youtube:- Ravikant mani tripathi

website: www.ravikantmani.in
Telegram : ravikant mani tripathi



Previous
Next

Copyright 2018. All Rights Reserved.